इस संबंध में सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम भाग-1 के नियम 124 के अनुसार अधिक भुगतान की वसूली के प्रावधान है किन्तु उक्त अधिक भुगतान की वसूली पर ब्याज का उल्लेख नहीं है परन्तु यह स्पष्ट है कि राजकीय आवास आवंटन के उपरान्त भी संबंधित अधिकारी/कर्मचारी द्वारा मकान किराये भत्ते की राशि का आहरण किया जाना आचरण नियमों के अनुरूप नहीं है।अतः ऐसे प्रकरणों में जहां उपरोक्त संदर्भित नियम के अनुसार राजकीय आवास आवंटित होने के उपरान्त भी राजकीय कर्मचारी द्वारा मकान किराया भत्ता प्राप्त किया गया है / जा रहा है, के कम में निर्देशित किया जाता है कि कार्यालयाध्यक्ष स्तर पर जांच की जाकर ऐसे आहरित किये गये मकान किराया भत्ते की एक मुश्त वसूली के साथ मकान किराये भत्ते की राशि पर सामान्य प्रावधायी निधि पर प्रभावी ब्याज दर के अनुरूप ब्याज की वसूली किया जाना सुनिश्चित किया जावे।
मुख्य बिंदु (Quick Summary)
✅ सरकारी आवास मिलने के बाद HRA लेना नियम विरुद्ध है।
✅ अधिक भुगतान की पूरी राशि एकमुश्त जमा करनी होगी।
✅ HRA पर ब्याज भी देना होगा।
✅ ब्याज की दर General Provident Fund (GPF) की प्रभावी ब्याज दर के बराबर होगी।
✅ कार्यालयाध्यक्ष जांच कर वसूली सुनिश्चित करेंगे।
राजकीय आवास मिलने के बाद HRA लेने पर क्या होगा?
यदि किसी राजकीय कर्मचारी या अधिकारी को सरकारी आवास (Government Quarter) आवंटित हो जाने के बाद भी मकान किराया भत्ता (House Rent Allowance - HRA) का भुगतान प्राप्त होता है, तो वह राशि अधिक भुगतान (Excess Payment) मानी जाएगी।
अब ऐसे मामलों में केवल HRA की वसूली ही नहीं बल्कि ब्याज सहित वसूली भी की जाएगी।
कौन सा नियम लागू होगा?
राजस्थान सरकार के अनुसार
सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियम भाग-1 के नियम 124
में अधिक भुगतान (Over Payment) की वसूली का प्रावधान पहले से मौजूद है।
हालांकि नियम 124 में ब्याज का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन सरकार ने निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि
यदि सरकारी आवास मिलने के बाद भी कर्मचारी HRA प्राप्त करता है तो यह आचरण नियमों के अनुरूप नहीं माना जाएगा और उस राशि पर GPF की प्रभावी ब्याज दर से ब्याज भी वसूला जाएगा।
ब्याज किस दर से लगेगा?
अधिक भुगतान की राशि पर वही ब्याज लगेगा जो
General Provident Fund (GPF)
पर उस अवधि में प्रभावी रहेगा।
उदाहरण
यदि किसी कर्मचारी ने
- ₹2,500 प्रति माह
- 24 माह तक
- कुल ₹60,000 HRA प्राप्त किया
तो
- ₹60,000 की वसूली होगी।
- साथ ही GPF की लागू ब्याज दर के अनुसार अतिरिक्त ब्याज भी जमा करना होगा।
वसूली कौन करेगा?
कार्यालयाध्यक्ष (Head of Office)
को निर्देश दिए गए हैं कि वे
- रिकॉर्ड की जांच करें।
- अधिक भुगतान का निर्धारण करें।
- ब्याज की गणना करें।
- एकमुश्त वसूली सुनिश्चित करें।
किन कर्मचारियों पर लागू होगा?
यह निर्देश उन सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा जिन्हें
- सरकारी आवास आवंटित हो चुका था,
- फिर भी HRA मिलता रहा,
- या वर्तमान में भी HRA प्राप्त कर रहे हैं।
क्या केवल राशि लौटानी होगी?
नहीं।
अब कर्मचारी को
- HRA की पूरी राशि
- तथा
- GPF ब्याज दर के अनुसार ब्याज
दोनों जमा करने होंगे।
महत्वपूर्ण निर्देश
यदि किसी कर्मचारी को यह जानकारी मिलती है कि उसे गलती से HRA का भुगतान हो रहा है, तो उसे तत्काल
- DDO
- कार्यालयाध्यक्ष
- लेखा शाखा
को सूचित करना चाहिए ताकि भविष्य में ब्याज सहित वसूली से बचा जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1. सरकारी आवास मिलने के बाद HRA मिल जाए तो क्या होगा?
उत्तर:
उसे अधिक भुगतान माना जाएगा तथा राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी।
प्रश्न 2. ब्याज किस दर से लगेगा?
उत्तर:
General Provident Fund (GPF) पर लागू प्रभावी ब्याज दर के अनुसार।
प्रश्न 3. वसूली कौन करेगा?
उत्तर:
कार्यालयाध्यक्ष जांच कर वसूली सुनिश्चित करेंगे।
प्रश्न 4. क्या नियम 124 में ब्याज लिखा हुआ है?
उत्तर:
नियम 124 में केवल अधिक भुगतान की वसूली का प्रावधान है। ब्याज वसूली सरकार द्वारा जारी निर्देशों के आधार पर की जाएगी।
प्रश्न 5. -किसी कार्मिक को गलत वेतन निर्धारण के कारण हुए अधिक वेतन भुगतान की रिकवरी करने का क्या नियम है क्या इस पर ब्याज देना होता है तथा क्या कर्मचारी इसे अपनी सुविधा अनुसार वेतन से कटौती करवा सकता है?
उत्तर:-▪️सामान्य परिस्थिति में वसूली राशि का ब्याज नहीं लगता है यदि वसूली आदेश में ब्याज सहित राशि वसूल करने के निर्देश होने पर राशि मय ब्याज वसूल होगी।
▪️यदि रिकवरी राजकीय आवास आवंटित होने पर भी HRA आहरण करने से संबंधित की है तो Fd के आदेश दिनांक 30/07/2021 के अनुसार GPF की दर पर ब्याज की भी वसूली करने के निर्देश है।
▪️यदि वसूली की राशि वर्तमान वित्त वर्ष की हो तो तथा वसूली की राशि ज्यादा होने पर आहरण वितरण अधिकारी को आवेदन पत्र देने पर वह वसूली राशि की किस्त बना कर वेतन से Rop कर सकते हैं। अथवा एक मुश्त राशि का चालान भी बना सकते हैं।
▪️वसूली की राशि पुराने वित्त वर्ष की हो तो वसूली की राशि को एक मुश्त चालान बना कर ही जमा करावे।
राजस्थान सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी को राजकीय आवास आवंटित होने के बाद भी मकान किराया भत्ता (HRA) प्राप्त होता है, तो यह नियमों के विपरीत माना जाएगा। ऐसे मामलों में न केवल अधिक भुगतान की पूरी राशि वापस ली जाएगी, बल्कि सामान्य प्रावधायी निधि (GPF) की प्रभावी ब्याज दर के अनुसार ब्याज की भी वसूली की जाएगी। इसलिए सभी कर्मचारियों को अपने वेतन एवं HRA की स्थिति की समय-समय पर जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में अनावश्यक वित्तीय दायित्व से बचा जा सके।

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