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पेंशन अदालत


पेंशनर्स को पेंशन प्रकरण प्रस्तुत करने एवं सेवानिवृति परिलाभों के भुगतान संबंधी पेंशनर्स को आ रही समस्याओं एवं शिकायतों का समाधान किये जाने के लिए वित्त विभाग द्वारा प्रत्येक संभाग स्तर पर प्रतिवर्ष माह अप्रेल, जुलाई, अक्टूबर एवं जनवरी में पेंशन अदालत आयोजन किये जाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में निम्नानुसार प्रस्तावित हैः-


 पेंशन अदालत का उद्देश्य

 सेवानिवृत होने वाले कार्मिकों के पेंशन प्रकरणों के निस्तारण में आ रही विशेष कर निम्न समस्याओं का मौके पर निस्तारण करना-
1. राजस्थान सेवा नियम, 1951 एवं राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996 के प्रावधानों के अन्तर्गत मार्गदर्शन अथवा स्पष्टीकरणों के अभाव में पेंशन प्रकरणों का विलम्ब से निस्तारण होता है, ऐसी स्थिति में पेंशन अदालत में विभाग के अधिकारी एवं पेंशन विभाग के अधिकारियों द्वारा इस प्रकार के नियमों की व्याख्या एवं स्पष्टीकरण प्रदान कर पेंशन प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाना।
2. विभागीय स्तर पर प्रक्रियात्मक त्रुटियों के कारण पेंशन प्रकरणों में होने वाले विलम्ब के कारणों को दूर करके मौके पर ही पेंशन प्रकरणों का निस्तारण करना।
3. सेवानिवृति प्रकरणों को तैयार करते समय आ रही तकनीकी समस्याओं की पहचान सुनिश्चित करते हुए उनका मौके पर ही निस्तारण करवाना।


पेंशन अदालत का आयोजन


1. प्रथम पेंशन अदालत माह अप्रेल, 2026 में आयोजित की जाएगी। आगामी पेंशन अदालत जुलाई 2026, अक्टूबर 2026 एवं जनवरी 2027 में आयोजित की जायेगी।
2. आगामी पेंशन अदालत हेतु स्थान एवं समय संबंधित पक्षों यथा पेंशनरों के संगठन तथा संबंधित अधिकारियों के विचार विमर्श के उपरांत निर्धारित किया जायेगा।                                                                                                                3. पेंशन अदालत हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार मीडिया एवं समाचार पत्रों के माध्यम से सुनिश्चित किया जायेगा।
4. पेंशन अदालत संभाग स्तर पर आयोजित की जायेगी एवं जिले से कोषाधिकारियों, कार्यालयाध्यक्षों एवं पेंशनरों के संगठन को वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से जोड़ा जायेगा।


 प्रतिनिधित्व


1. पेंशन अदालत प्रत्येक संभाग स्तर पर आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। उक्त प्रस्ताव में प्रथम चरण में, जिसकी कार्य योजना निम्नानुसार है:-
(a) प्राथमिकताः प्रथम पेंशन अदालत पारिवारिक पेंशनरों हेतु समर्पित रहेगी और विधवा/तलाकशुदा/अविवाहित पुत्री/दिव्यांग व्यक्तियों के पेंशन को प्राथमिकता से निपटाया जाएगा।
2. राज्य के शिक्षा विभाग से प्रतिवर्ष लगभग 11,000 सेवानिवृत कार्मिकों के पीपीओ जारी किये जाते हैं। 31 मार्च 2026 तक शिक्षा विभाग से लगभग 2200 कार्मिक सेवानिवृत होने वाले हैं एवं लगभग 700 कार्मिक ऐसे हैं, जो सेवानिवृत हो चुके है परन्तु उनके पेंशन प्रकरण अभी तक पेंशन विभाग को प्राप्त नहीं हुए हैं, जिस कारण उनकी पेंशन अधिकृतियां जारी नहीं हो सकी हैं। शिक्षा विभाग के पेंशन प्रकरणों के निस्तारण में अत्यधिक कठिनाईयां रहती है। इसलिए प्रथम चरण में शिक्षा विभाग के सेवानिवृत कार्मिकों/पेंशनर्स के लिए पेंशन अदालत आयोजित की जाएगी।                                                                                                                                                                                                                     3. (ए) संभाग स्तर पर प्रथम बैठक में शिक्षा विभाग के प्रकरणों की बहुल्यता को देखते हुए निम्नलिखित अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जायेगी एवं संभाग के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से जुड़ेंगेः-
(i) अतिरिक्त निदेशक, पेंशन एंव पेंशनर्स कल्याण विभाग, क्षेत्रीय कार्यालय संयोजक
(ii) संयुक्त निदेशक, प्रारम्भिक एवं माध्यमिक शिक्षा-सदस्य
(iii) संभाग के अधीन कोषाधिकारी समस्त सदस्य
(iv) जिला पेंशन समाज/पेंशन मंच के प्रतिनिधि संभाग के अधीन सदस्य
(बी) निदेशक माध्यमिक/ प्रारम्भिक शिक्षा बीकानेर के स्तर पर (समीक्षा कैम्प)
(i) निदेशक माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर-संयोजक
(ii) संयुक्त शासन सचिव, स्कुल शिक्षा सदस्य
(iii) निदेशक पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग, जयपुर- सदस्य
(iv) प्रदेशाध्यक्ष पेंशन समाज/पेंशनर्स मंच सदस्य
साथ ही, पेंशन अदालत में निम्नानुसार अधिकारियों की उपस्थिति वांछित रहेगी-
(1) संबंधित विभागाध्यक्ष - संयोजक
(ii) संबंधित प्रशासनिक विभाग का संयुक्त शासन सचिव - सदस्य
(iii) निदेशक/अतिरिक्त निदेशक पेंशन एवं पेंशनर्स कल्याण विभाग, जयपुर-सदस्य
(iv) प्रदेशाध्यक्ष पेंशन समाज / पेंशनर्स मंच सदस्य जो अधिकारी पेंशन अदालत में उपस्थित रहेंगे वे उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आवश्यक निर्णय लेकर मौके पर ही पेंशनर्स की समस्याओं का निराकरण करेंगे।
4. मार्च 2026 में जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में सभी जिलें के कोषाधिकारी एवं संभाग स्तर के पेंशन विभाग के अधिकारी लंबित पेंशन प्रकरणों की अपने स्तर से बैठक कर समीक्षा किया जाना सुनिश्चित करेंगे। जो अधिकारी भौतिक रूप से उपस्थित नहीं हो सकते, वह अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से जुड़ सकेंगे।


 पेंशन प्रकरणों में सामान्य आक्षेप

 निम्न आक्षेप जिनके कारण पेंशन प्रकरणों के निस्तारण में विलम्ब होता है, के संबंध में अग्रिम रूप से पेंशन अदालत के पूर्व सभी विभागाध्यक्ष / कार्यालयाध्यक्षों को जानकारी दी जायेगी:- 

1. प्रारूप 6 निर्धारित प्रपत्र में विभागीय जाँच अथवा दाण्डिक /आपराधिक कार्यवाही बकाया न होने का प्रकरण पत्र संलग्न नहीं करना।
2. अन्तिम वेतन भुगतान प्रमाण पत्र संलग्न नहीं करना।
3. लेखकर्मी का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करना।
4. उपादान हेतु मनोनयन पत्र एवं प्रपत्र 12 संलग्न नहीं करना।
5. विभागीय अदेयता प्रमाण-पत्र संलग्न नहीं करना।
6. असाधारण अवकाश का विवरण अंकित नहीं करना।
7. शिक्षा सेवा के अध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक के प्रकरणों में नियुक्ति अवधि (01 जनवरी से 30 जून) मध्य सत्र होने के कारण नियुक्ति पत्र संलग्न नहीं करना।
8. फार्म 27ए (सरकारी आवास) एवं फार्म 28ए (दीर्घकालीन ऋण) संलग्न नहीं करना।
9. अनुदानित संस्था द्वारा सेवा अवधि एवं प्राप्त उपादान राशि का प्रमाण-पत्र संलग्न नहीं करना
10. कार्मिक वर्कचार्ज सेवा में रहने पर बीमा विभाग द्वारा जारी की गई हस्तान्तरण प्रविष्टि (टी०ई०) संलग्न नहीं करना।                                                                                                                                                                          11. कार्मिक के पति/पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र/तलाक डिक्री संलग्न नहीं करना।
12. राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग के परिपत्र दिनांक 27.01.2025 के अनुसार पेंशन प्रकरण नहीं भिजवाना।
13. वर्कचार्ज कार्मिक की प्रथम नियुक्ति दिनांक अर्द्धस्थायी दिनांक के अनुसार प्रकरण नहीं भिजवाना।                                                                                                                                                                                          14. स्वैच्छिक सेवानिवृति दिवस अकार्य दिवस होने के कारण अकार्य दिवस का वेतन देय नहीं होने के कारण इसके अनुरूप एल.पी.सी. संलग्न नहीं करना।
15. माननीय न्यायालयों के निर्णयों की पालना में सक्षम स्वीकृति संलग्न नहीं करना।


 पेंशन अदालत में अनुज्ञेय योग्य प्रकरण


1. पेंशन अदालत में नीतिगत निर्णय संबंधी प्रकरण विचारार्थ नहीं रखे जायेंगे।
2. पेंशन अदालत में माननीय न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण विचारार्थ नहीं रखे जायेंगे।
3. शिकायतें निराधार होने पर पेंशनर को लिखित में सलाह दी जायेगी।
4. किसी भी प्रकरण को विचारार्थ / निर्णयार्थ तब तक नहीं रोका जायेगा जब तक अनिवार्य नहीं हो।
5. पेंशन अदालत से तात्पर्य यह नहीं होगा कि उन प्रकरणों को रोका जाये जो सामान्य प्रक्रिया से ही निस्तारित हो सकते हैं। इन प्रकरणों को पेंशन अदालत के आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए नहीं रोका जाना चाहिये।


 पेंशन अदालतों में पेंशनर्स को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसके के लिए छाया-पानी, चिकित्सा सुविधा आदि आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जायेंगी।


 मूल्यांकन एवं पर्यवेक्षण

1. पेंशन अदालत में समस्त लंबित प्रकरणों का विभागवार एवं कार्यालयवार संकलन किया जाकर निस्तारित प्रकरणों को दर्शाया जायेगा और जो प्रकरण निस्तारित नहीं हो सकेंगे। उनके लिए संबंधित विभाग, कार्यालय को निश्चित समय निर्धारित करते हुए निस्तारण की समय अवधि दी जायेगी। लंबित एवं अनिस्तारित प्रकरणों की समयबद्ध समीक्षा की जायेगी और फॉलो-अप कार्यवाही करते हुए यह सुनिश्चित किया जायेगा कि समयबद्ध रूप से उनका निस्तारण हो सके।
2. पेंशन अदालत की समीक्षा पेंशन अदालत आयोजित होने के उपरांत हर दो माह पश्चात् विस्तृत रूप से की जायेगी। जिसमें यह जानकारी प्रदर्शित की जायेगी कि कुल कितने परिवेदनाएं / प्रकरण प्राप्त हुए थे, उनमें से कितने प्रकरणों का पेंशन अदालत में निस्तारण मौके पर कर दिया गया था तथा जिन मामलों में प्रकरणों का निस्तारण नहीं हुआ था, उनमें जो समय संबंधित विभाग / कार्यालय को दिया गया था। क्या उस समय अवधि में संबंधित विभाग ने परिवेदना/प्रकरण का निस्तारण कर दिया? यदि संबंधित परिवेदना/प्रकरण का निस्तारण संबंधित विभाग / कार्यालय द्वारा समय पर नहीं किया जाता है, तो आगामी पेंशन अदालत से पूर्व उन अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही का प्रस्ताव समक्ष प्राधिकारी को भिजवाया जायेगा। साथ ही, पेंशन अदालत में यह व्यवस्था भी की जायेगी कि संतुष्टि के संबंध में फीडबैक लिया जाकर उसे प्रदर्शित किया जाये।
3. पेंशन अदालत आयोजन के उपरांत मीडिया/ समाचार पत्रों में इसकी सफलता के संबंध में सूचित कराते हुए जो सक्सेस स्टोरी होंगी, उन्हें डीआईपीआर के माध्यम से आम जनता की जानकारी लाया जायेगा। साथ ही, मासिक रिपोर्ट में ऐसी सक्सेस स्टोरी को सम्मिलित किया जायेगा।                                                                                                                                                                                                                                                                     4.पेंशन अदालत की प्रगति और कार्यवाही की समीक्षा वित्त (पेंशन) विभाग के स्तर से की जायेगी।

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